Wednesday, 13 January 2010

दिल तो चमक सकेगा क्या फिर भी तरश के देख लें!


सुकूने दिल के लिए कुछ तो ऐहतमाम करूँ,

जरा नज़र जो मिले फिर उन्हें सलाम करूँ,
मुझे तो होश नहीं आप मशवरा दीजिये,
कहाँ से छेडू फ़साना कहाँ तमाम करूँ,

- दिलीप कुमार

चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया,
इश्क़ के इस सफ़र ने तो मुझको निढाल कर दिया,
मिलते हुए दिलों के बीच और था फैसला कोई,
उसने मगर बिछड़ते वक़्त और सवाल कर दिया,

मेरी गुलजमी तुझे चाह थी एक किताब की,
एहले किताब ने मगर क्या तेरा हाल कर दिया,
अबके हवा के साथ है दामने यार मुल्तजिर,
बानुए सब के हाथ में रखना सवाल कर दिया,

मुमकिना फैसलों में एक हिज्र का फैसला भी था,
हमने तो एक बात की उसने कमाल कर दिया,

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी,
दिल को ख़ुशी के साथ होता रहा मलाल भी,

दिल तो चमक सकेगा क्या फिर भी तरश के देख लें,
शीशा गराने शहर के हाथ का ये कमाल भी,

उसको पा सके थे जब दिल का अजीब हाल था,
अब जो पलट के देखिये बात थी कुछ मुहाल भी,
मेरी तलब था एक शख्श वो जो नहीं मिला तो फिर,
हाथ दुआ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी,

- परवीन शाकिर

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