Wednesday, 13 January 2010

हमने सहे हैं जितने सितम सहके देखिये !


यहाँ पर राम बसता यहाँ रहमान बसता है,

यहाँ हर जात का हर कौम का इंसान बसता है,

जो हिदू हो तो क्या तुम ही फ़क़त हिन्दुस्तानी हो,
यहाँ हर एक मुस्लिम दिल में हिंदुस्तान बसता है

कहना हो जो आसां तो ग़ज़ल कह के देखिये,
हमने सहे हैं जितने सितम सहके देखिये,
हालत के बुशों से भी टकरा के जहाँ में,
लादेन से बेख़ौफ़ खतर रह के देखिये

- लता हया

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